साल 2012 में भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच कॉमनवेल्थ बैंक त्रिकोणीय सीरीज खेली जा रही थी। इस सीरीज के 11वें मैच में भारत की टक्कर श्रीलंका से हुई, टीम इंडिया को सीरीज में बने रहने के लिए बड़े मार्जिन से जीत दर्ज करने के दरकार थे।
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भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। श्रीलंका ने कुमार संगाकारा की 87 गेंदों में 105 रन और तिलकरत्ने दिलशान की 165 गेंदों में 160 रन की नाबाद पारी की बदौलत निर्धारित 50 ओवर में 4 विकेट खोकर 320 रन बनाएं। अब यहां से भारत को सीरीज में बने रहने के लिए 321 रन का लक्ष्य मात्र 37 ओवर में तय करना था।
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सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की जोड़ी पारी की शुरुआत करने उतरी, दोनो ही ओपनर सस्ते में पवेलियन लौट गए। इसके अलावा गौतम गंभीर ने 64 गेंदों में 63 रन की पारी खेली।
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यहां से भारत का 37 ओवर में 321 रन का लक्ष्य तय करना तो दूर मैच जितना भी मुश्किल लग रहा था। फिर क्रिज पर युवा विराट कोहली की एंट्री हुई। विराट कोहली ने मैदान से सभी ओर चौके और छक्कों की बौछार कर दी। विराट कोहली ने सिर्फ 86 गेंदों का सामना करते हुए 16 चौके और 2 छक्के मारते हुए 36.4 ओवर में मैच जीत लिया।
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भारत की इस बड़ी जीत में सुरेश रैना ने भी 24 गेंदों में 40 रन की तेज पारी से योगदान दिया।
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विराट कोहली ने श्रीलंका के दिग्गज गेंदबाज लसिथ मलिंगा और नुवान कुलासेकरा को निशाने पर लिया। मलिंगा ने सिर्फ 7.4 ओवर में 12.52 की इकोनॉमी से 96 रन लुटा दिए। वहीं कुलासेकरा ने 8 ओवर में 71 रन दिये।
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विराट कोहली को इस अद्भुत पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। इसी मैच के बाद से विराट कोहली ने लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता हासिल की हैं।
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भारत ने इस मैच को 36.4 ओवर में जीतकर सीरीज में बने रहने के अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा।
भारतीय टीम को हर हाल मे 37 ओवर मे बनाने थे 321 रन, फिर कोहली ने खेली थी विराट पारी
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अगस्त 02, 2019
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